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लालबहादुर शास्त्री

 

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सात मील दूर एक छोटे से रेलवे शहर मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे। जब लाल बहादुर शास्त्री केवल डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। उनकी माँ अपने तीनों बच्चों के साथ अपने पिता के घर जाकर बस गईं।

शास्त्री जी को वाराणसी में उनके चाचा के साथ रहने के लिए भेजा गया था ताकि वह हाई स्कूल में जा सके। उनके चाचा उन्हें नन्हे कहकर बुलाया करते थे। वह भरी गर्मी में भी बिना जूते के कई मील पैदल चलकर स्कूल जाते थे।

काशी विद्या पीठ ने लाल बहादुर शास्त्री को 1926 में 'शास्त्री' की उपाधि दी। काशी विद्या पीठ से उन्होंने स्नातक की पढ़ाई की थी। 1927 में उनकी शादी हो गई। उनकी पत्नी ललिता देवी मिर्जापुर से थीं जो उनके अपने शहर के पास ही था। उनकी शादी सभी तरह से पारंपरिक थी। दहेज के नाम पर एक चरखा एवं हाथ से बुने हुए कुछ मीटर कपड़े थे। वे दहेज के रूप में इससे ज्यादा कुछ और नहीं चाहते थे।

1930 में महात्मा गांधी ने नमक कानून को तोड़ते हुए दांडी यात्रा की। इस प्रतीकात्मक सन्देश ने पूरे देश में एक तरह की क्रांति ला दी। लाल बहादुर शास्त्री विह्वल ऊर्जा के साथ स्वतंत्रता के इस संघर्ष में शामिल हो गए। उन्होंने कई विद्रोही अभियानों का नेतृत्व किया एवं कुल सात वर्षों तक ब्रिटिश जेलों में रहे। आजादी के इस संघर्ष ने उन्हें पूर्णतः परिपक्व बना दिया।

1946 में जब कांग्रेस सरकार का गठन हुआ तो इस ‘छोटे से डायनमो को देश के शासन में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए कहा गया। उन्हें अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश का संसदीय सचिव नियुक्त किया गया और जल्द ही वे गृह मंत्री के पद पर भी आसीन हुए।

लाल बहादुर शास्त्री सादा जीवन और उच्च विचार रखने वाले व्यक्तित्व थे. उनका पूरा जीवन हर व्यक्ति के लिए अनुकरणीय है. जय जवान-जय किसान का नारा देकर उन्होंने न सिर्फ देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात जवानों का मनोबल बढ़ाया बल्कि खेतों में अनाज पैदा कर देशवासियों का पेट भरने वाले किसानों का आत्मबल भी बढ़ाया

लाल बहादुर शास्त्री के बारे में कुछ रोचक तथ्य

1. जब इंदिरा गाँधी शास्त्री जी के घर (प्रधान मंत्री आवास) पर पहुची तो कहा कि यह तो चपरासी का घर लग रहा है, इतनी सादगी थी हमारे शास्त्रीजी में…

 

2. शास्त्री जी अभी तक के एक मात्र ऐसे प्रधान मंत्री रहे हैं जिनहोने देश के बजट मे से 25 प्रतिशत सेना के ऊपर खर्च करनेका फैसला लिया था।शास्त्री ने जय जवान जय किसान" का नारा दिया और भारत के भविष्य को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

 

3. जब भारत पाकिस्तान का युद्ध चल रहा तो अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए कहा था की भारत युद्ध खत्म कर दे नहीं तो अमेरिका भारत को खाने के लिए गेहू देना बंद कर देगा तो इसके जवाब मे शास्त्री जी ने कहा की हम स्वाभिमान से भूखे रहना पसंद करेंगे किसी के सामने भीख मांगने की जगह |

 

4. लाल बहादुर शास्त्री जी ने अपने विवाह के समय दहेज प्रथा के विरुद्ध जाकर मात्र खादी का कपड़ा और चरखा ही स्वीकार किया |

 

5. लाल बहादुर शास्त्री जी ने अपने प्रधानमन्त्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने हरित और श्वेत क्रांति को प्रोत्साहित और बढ़ावा देने का कार्य किया और गुजरात के आनंद में स्थित अमूल दूध सहकारी के साथ मिलकर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना की |

 

6. लाल बहादुर शास्त्री जी की सूझबूझ से ही पाकिस्तान भारत से वर्ष 1965 में युद्ध हार गया था जो कि सोचता था कि वर्ष 1962 में मिली चीन की हार से भारत कमजोर हो गया होगा |

 

7.   लाल बहादुर शास्त्री जी अपने जीवन में बहुत सरल, ईमानदार और साधारण व्यक्तित्व के व्यक्ति   थे| वे फटे कपड़ों से बाद में रूमाल बनवाते थे औऱ फटे कुर्तों को कोट के नीचे पहनते थे।

 

8. लाल बहादुर शास्त्री जी का असली नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था | शास्त्री की उपाधि उन्हें काशी विद्यापीठ से स्नातक की शिक्षा पूर्ण करने के बाद मिली जिसके बाद वह अपने नाम के आगे शास्त्री लगाने लगे |

 

9. भारत के खाद्य उत्पादन की मांग को बढ़ावा देने के लिए हरित क्रांति के विचार को भी एकीकृत किया था।

 

10.   दहेज प्रथा और जाति प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई।

 

शास्त्री का प्रधानमंत्री बनना संयोग भले ही नहीं कहा जाए. लेकिन उनका नेहरू का उत्तराधिकारी बनना स्वाभाविक भी नहीं था. वे एक गांधीवादी नेता थे. लेकिन उनका पार्टी में शीर्ष नेताओं के बीच प्रमुखता से छा जाना अचानक नहीं हुआ. कहा जाता है कि नेहरू ने अपने अंतिम दिनों में प्रधानमंत्री रहते हुए शास्त्री को काफी जिम्मेदारियां सौंपनी शुरू कर दीं थीं, जिससे पार्टी में ये संदेश गया कि वो उन्हें अगले प्रधानमंत्री के रूप में तैयार कर रहे हैं.

उस समय प्रधानमंत्री पद की दौड़ में  गुलजारी लाल नंदा, जय प्रकाश नारायाण और मोरारजी देसाई शामिल थे जो शास्त्री की दावेदारी को कड़ी टक्कर दे रहे थे. गुलजारी लाल नंदा थे तब गृह मंत्री थे और इस लिहाज से मंत्रिमंडल में दूसरे स्थान पर थे. मोरारजी देसाई भी थे जिनका मंत्रिमंडल के बाहर बहुत गहरा प्रभाव था. जय प्रकाश नारायण का भी अपना करिश्माई व्यक्तित्व था.

शास्त्री जी ने 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में अंतिम सांस ली थी. 10 जनवरी 1966 को ताशकंद में पाकिस्तान के साथ शांति समझौते पर करार के महज 12 घंटे बाद (11 जनवरी) लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गई थी.

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